58 वर्षों की छोटी सी जिंदगी में प्रेमचंद ने जो कुछ रचा वो सदियों तक दुनिया को मनुष्यता के करीब रखेगा। लमही की तरह गोरखपुर को गर्व है प्रेमचंद की विरासत पर। इस शहर ने प्रेमचंद को रचने में अपनी भूमिका...from Live Hindustan Rss feed https://ift.tt/2mZHoCo


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